Tokyo Olympics Neeraj Chopra exclusive interview on Zee News with Kiran Chopra after Winning Gold Medal |Neeraj Chopra ने क्यों कटवाए अपने लंबे बाल? Zee News के साथ Exclusive Interview में खुल गया राज


नई दिल्ली: भारत के एथलीट नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में इतिहास रच दिया है. उन्होंने एक सदी से भी ज्यादा लंबे इंतजार के बाद भारत को एथलेटिक्स (Athletics) में ओलंपिक गोल्ड मेडल (Gold Medal) दिला दिया. जैवलिन थ्रो (Javelin Throw) के फाइनल में उन्होंने 87.58 की दूरी तक भाला फेंका.

Zee News के साथ खास बातचीत

टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में गोल्ड मेडल (Gold Medal) के फौरन बाद नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने Zee News को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. हमारी रिपोर्टर किरण चोपड़ा (Kiran Chopra) ने भारत के ‘गोल्डन ब्वॉय’ से खास बातचीत की, जिसमें कई राज की बातें सामने आईं हैं. आइए जानते हैं की नीरज ने क्या कहा.

किरण चोपड़ा: बहुत बहुत बधाई नीरज, बहुत बहुत शुभकामनाएं और बहुत शुक्रिया हमारे साथ जुड़ने के लिए, सबसे पहले जो आपने हमें गर्व करवाया है. पूरे देश को आप पर गर्व है, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपाका, क्या वो फीलिंग आ पाई है कि आपने जो हासिल किया है वो आज तक कोई भी एथलीट हासिल नहीं कर पाया है. एथलेटिक्स में आपने मेडल दिलाया है और वो भी गोल्ड?

नीरज चोपड़ा: अभी भी ऐसा लग रहा है कि पता नहीं ये सही में हुआ है या… बीच बीच में लगता है कि नॉर्मल हो जाता हूं, फिर लगता है कि आज कुछ अलग हुआ है. कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा, पर मैं ये आपको मेडल दिखा देता हूं, पास में है.

किरण चोपड़ा: थोड़ा जूम करके दिखाइए हमारे दर्शकों को गोल्ड मेडल, जो सभी देखना चाहते हैं, जिसपर पूरा देश गर्व कर रहा है. 

(नीरज चोपड़ा कैमरे के सामने अपना मेडल दिखाते हैं)

किरण चोपड़ा: हम सभी के लिए वो पल बहुत इमोशनल था, मुझे यकीन है कि बहुत लोग रोए हैं उस वक्त, उस पल को देखकर , तो किसको ये मेडल डेडिकेट करना चाहेंगे, इतनी कड़ी मेहनत के बाद आपने ये हासिल किया है. कौन वो खास शख्स हैं जिन्हें आप ये मेडल डेडिकेट करना चाहते हैं?

नीरज चोपड़ा: मुझे लगता है कि जो हमारे एथलीट थे, जो चौथी पोजीशन पर रह गए, जिनका मेडल आते आते रह गया, जैसे मिल्खा सिंह जी हैं, पीटी ऊषा जी हैं और भी काफी एथलीट हैं. खासकर मिल्खा सिंह का सपना था कि कोई एथलेटिक्स में मेडल लाए, कोई गोल्ड जीते और अपना राष्ट्रगाण बजे. तो आज उनका सपना पूरा हुआ है, लेकिन वो आज हमारे बीच नहीं हैं. इस बात का दुख है कि वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जहां भी वो हैं, हमें देखकर काफी खुश हो रहे होंगे.

किरण चोपड़ा: आपको पता चला है कि आपके गांव में कैसा माहौल है, कैसे वहां त्योहार की तरह सेलिब्रेट कर रहे हैं. मम्मी-पापा से बात हो पाई, परिवार में किसी से बात हो पाई?

नीरज चोपड़ा: अभी मेरी किसी से बात नहीं हो पाई, अभी तो मैं आया हूं, स्टेडियम में मीडिया वालों थे वहां, तो अभी मेरी बात नहीं हुई.

किरण चोपड़ा: जब आप इस इवेंट के लिए जाने वाले थे, तब आपके मन में क्या चल रहा था. आप पहला ओलंपिक खेल रहे थे और पहला ओलंपिक फाइनल खेल रहे थे वो भी क्वालीफाइंग राउंड में नंबर वन आकर, क्या कुछ प्रेशर था या भी भरोसा था कि जरूर जीतेंगे?

नीरज चोपड़ा: मेरे दिमाग में आ रहा था कि बहुत बड़ा दिन है और तैयार भी था, मेहनत अच्छी हुई थी और क्वालिफाइंग राउंड में भी अच्छी थ्रो हुई थी जिससे कॉन्फिडेंस मिला कि फाइनल में रिजल्ट अच्छा आएगा. काफी अच्छा था और बॉडी भी अच्छा फील कर रही थी. तो लग रहा था कि आज कुछ अच्छा होने वाला है. 

किरण चोपड़ा: नीरज उस थ्रो की बात करेंगे 87.58 वाली, जिसने आपको ये गोल्ड मेडल दिलाया, उस वक्त गोल्ड मेडल के बड़े दावेदार वेटर (Johannes Vetter) फाउल कर रहे थे. उस थ्रो के वक्त जब आपने देखा कि ये स्कोर आया है, तब क्या चल रहा था दिमाग में, तब लग रहा था कि मैंने वो थ्रो कर दिया है जो अब मुझे गोल्ड मेडल पक्का कर देगा?

नीरज चोपड़ा: सच बताऊं तो अजीब सी फीलिंग आ रही थी कि वो कितना बड़ा एथलीट है और कितना बड़ा थ्रोअर है, वो बेस्ट स्टेट से बाहर निकल गया, अजीब भी लगा, लेकिन फिर मैंने खुद की तरफ ध्यान दिया, ये स्पोर्ट्स है और ये सब चलता रहता है. उनके लिए बुरा लगा लेकिन फिर मैंने अपनी थ्रो के लिए कोशिश की कि मैं और अच्छा करूं.

 

 

किरण चोपड़ा: नीरज आप देश के सबसे बड़े हीरो हैं और पूरा देश आपका सुनना चाहता है, आपके बारे में जानना चाहता है कि नीरज को क्या पसंद है और क्या नापसंद है. कौन सी चीज है जो आपको बहुत पसंद है और आप वो करना चाहते हैं?

नीरज चोपड़ा: कोई ऐसी जगह, या ऐसा देश जो फेमस हैं वहां घूमना पसंद करेंगे. 

किरण चोपड़ा: एक एथलीट का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है कि वो गोल्ड मेडल जीते, उसके लिए हर खिलाड़ी को कुर्बानियां भी देनी पड़ती है. कौन सी ऐसी कुर्बानी है, जो अब लगता है कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद ये करना है?

नीरज चोपड़ा: सबसे बड़ी कुर्बानी होती है अपने घरवालों से दूर रहना. अगर कोई खिलाड़ी 10-15 साल तक मेहनत करता है तो ज्यादातर वक्त परिवार से दूर ही रहता है. तो मैं सबसे पहले घर जाउंगा और परिवार के साथ खाना खाउंगा. उसके बाद अगले कॉम्पिटीशन के लिए तैयारी शुरू कर दूंगा. तो सबसे बड़ी कुर्बानी ये होती है कि जो घरवाले हमें इतना सपोर्ट करते हैं हम उनके साथ नहीं रह पाते. शादी और पार्टीज में नहीं जा पाते, क्योंकि एथलीट को ये सभी चीजें छोड़नी पड़ती है. जितनी जरूरी ट्रेनिंग है उतनी जरूरी डाइट है और उतना ही अहम आराम करना है. ये सभी चीजें मिलकर एक अच्छा एथलीट बनाता है. 

किरण चोपड़ा: आपकी कामयाबी का क्या राज है जो आपको गोल्ड मेडल तक ले आया?

नीरज चोपड़ा: बस मुझे लगता है कि कहीं नहीं कहीं हमारा जो दिमाग है, वो ये कहता है कि हम तो ये नहीं जीत पाएंगे, ये काफी मुश्किल कॉम्पिटीशन है, हमारे विपक्षी खिलाड़ी काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं उनके अंदर मुझसे ज्यादा टैलेंट है, तो मेरे हिसाब से ऐसा कभी नहीं सोचना चाहिए, मैं बताऊं आपको कि वहां मुझसे भी अच्छे खिलाड़ी थे, वर्ल्ड चैंपियन थे और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट थे, लेकिन ये दिन-दिन की बात होती है, ये मेरा दिन था तो आज मुझे गोल्ड मिला है. तो हमें आपना सौ फीसदी देना चाहिए और ऐसा कभी भी नहीं सोचना चाहिए कभी घबराना नहीं चाहिए. 

किरण चोपड़ा: आपके लंबे बात और आपका हेयरस्टाइल काफी फेमस है, लेकिन जब आप टोक्यो आए तो नया हेयरस्टाइल लेकर आए, इसे पीछे की क्या कहानी है?

नीरज चोपड़ा: पिछले 3-4 कॉम्पिटीशन मैंने खेला था तो मेरे बाल मुझे काफी तंग कर रहे थे, काफी पसीने आते थे, आखों में भी गिरते थे, उनकी देखभाल भी करनी पड़ती थी, तो लग रहा था कि ये थ्रो के वक्त थोड़ी परेशानी पैदा कर रहे हैं. तो मुझे लगा कि वो स्पोर्ट्स करियर में दिक्कत कर रहे हैं तो मैंने उन्हें कटवा लिए. सबसे पहले स्पोर्ट्स है और फिर ये लुक वगैरह.





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