एक लड़के को गले लगाते समय एक महिला के दिमाग में क्या चल रहा होता है?

एक लड़के को गले लगाते समय एक महिला के दिमाग में क्या चल रहा होता है? – एक लड़का + एक महिला

एक बच्चा (लड़का) की उमर के चार पड़ाव

बच्चा (लड़का) – बचपन

लड़का – टीन एज

युवक – जवान ( young)

आदमी -परिपक्व (शादीशुदा भी हो सकता है)

महिला के चार रूप

बच्चा (लड़की) – बचपन

लड़की -टीन एज

युवती – जवान

महिला -परिपक्व, (कुशल)(शादीशुदा भी हो सकती है)

प्रश्न के अनुसार ही जवाब है कि एक स्वस्थ दिमाग वाली महिला एक लड़के को गले लगाते समय बेटे का या अपने छोटे भाई का भाव ही दिमाग में रखेगी।

क्योंकि लड़का जो टीन एज का है,

महिला जो परिपक्व ( कुशल) है, उमर के इस पड़ाव में आते आते उसमें, उसकी भावनाओं में एक ठहराव आ जाता है, वह युवती ( जवानी के नशे में मदमस्त नदी की तरह) नहीं होती।

उसके भाव पारदर्शी हो जाते है, मतलब सब साफ़ – साफ़ (अच्छे बुरे की पहचान) दिखाई देता है।

इसलिए जो उसके दिमाग में चलता है,वह साफ दिखाई देता है।

वैसे यूं देखा जाए , तो समाज रूपी समंदर में हीरे, मोती, कंकण, भयानक समुद्री जीव, आंखों को सुंदर अनुभूति देने वाले जीव बहुत कुछ हैं।

सबके लिए हमारी भावनाएं अलग अलग होती है, किसी को हम घर में pot में रखते है, उसकी देखभाल करते है।

तो किसी से हम दूर भागते है,

सब समझ होने के बाबजूद, ये खुद का डिसीजन होता है, कि हमको सामने वाले के साथ कैसा व्यवहार करना है।

बचपन से लेकर जवानी में कदम रखते – रखते हर इंसान से कुछ न कुछ गलतियां होती जाती है, पर महिला या आदमी बनने की…

इस उमर के पड़ाव में, हर इंसान के स्वभाव में, सोच में एक स्थिरता आ जाती है और वह सही निर्णय ले सकता है।

फोटो गुगल से

धन्यवाद🙏

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